बरेली। रुहेलखंड से ब्रज पश्चिम तक ओबीसी पॉलटिक्स के दिग्गज चेहरा माने जाने वाले पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप के ‘ प्लान 2027-29’ ने विरोधियों की नींद उड़ा दी है। कई बार विधायक, मंत्री, सांसद रह चुके धर्मेन्द्र कश्यप चुनावी मोर्चे पर लगातार भाजपा की ताकत बढ़ाते रहे हैं। वही काम उनकी एडवोकेट बेटी कीर्ति कश्यप भी करती नजर आ रही हैं। पिता के ‘ प्री-इलेक्शन प्लान ’ पर काम करते हुए एडवोकेट कीर्ति ने राजनीति की पिच पर जोरदार तरीके से बैटिंग भी शुरू कर दी है। गांव-गांव, घर-घर मजबूती पकड़ बना रहीं कीर्ति कश्यप का उत्साही अंदाज सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त तरीके से उनकी फॉलोइंग बढ़ा रहा है। बिथरी-आंवला से दातागंज-शेखूपुर तक ग्राम-चौपालों पर सुबह से रात तक कीर्ति जनता के दुख-सुख में शामिल हो रही हैं। भविष्य के बड़े लक्ष्य के साथ उनका कारवां बढ़ता ही जा रहा है।

पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप की तरह एडवोकेट कीर्ति कश्यप कैसे क्षेत्र में जनता के बीच अपनी पैठ बढ़ा रही हैं, यह समझने के लिए पहले पिता की राजनैतिक ताकत एवं राजनीति के अंदाज के बारे में जानना जरूरी है। बरेली की सन्हा-बिथरी क्षेत्र से दो बार एमएलए और आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे धर्मेन्द्र कश्यप अपनी खास राजनैतिक शैली के लिए पहचाने जाते हैं। दूसरों की तरह जनता-कार्यकर्ताओं से मेल-मुलाकात में समय की पाबंदियां उनके यहां कभी देखी-सुनी नहीं जाती हैं। यही वजह है कि लोग दिवानों की तरह सुबह से रात तक बरेली में कांधरपुर स्थित उनके आवास पर दौड़ लगाते देखे जाते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा छोड़ धर्मेन्द्र कश्यप जब भाजपा में शामिल हुए थे तो देवचरा में हुई उनकी रैली में जुटा बेहिसाब जनसैलाब सियासी हलकों में अब तक याद किया जाता है। उन्होंने तीन दशक पहले क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में राजनैतिक पारी की शुरूआत की थी और फिर चुनावी सीढ़ियां किस तरह चढ़ीं, ये खुद में मिसाल है। वीडीसी के बाद वह जिला पंचायत सदस्य चुनाव भी जीते थे।

2002 के विधानसभा चुनाव में बरेली की सन्हा(बिथरी) सीट भाजपा की तत्कालीन विधायक ठाकुर सुमनलता सिंह और समाजवादी दिग्गज वीरपाल सिंह यादव को धड़कनें रोक देने वाले मुकाबले में उस वक्त के बसपा उम्मीदवार धर्मेन्द्र कश्यप ने जिस तरह पटखनी दी थी, उसे बड़ा राजनैतिक उलटफेर माना गया था। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। धर्मेन्द्र कश्यप दो बार विधायक रहे हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन आंवला सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी को कांटे की टक्कर देकर राज्य की सियासत में सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था। 2014 में धर्मेन्द्र कश्यप ने सपा प्रत्याशी पूर्व सांसद कुंवर सर्वराज सिंह को बड़े अंतराल से पराजित कर लोकसभा की राह तय की थी। इसके बाद उन्होंने आंवला लोकसभा के रण में 2019 में भी शानदार जीत दर्ज की, लेकिन भितरघात की वजह से 2024 के चुनावी मुकाबले में वह जीत से थोड़ी दूर रह गए थे।

पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप वैसे तो हर वर्ग तबके में पैठ रखते हैं, लेकिन अपने कश्यप-निशाद समाज में उनकी लोकप्रियता के आगे दूर-दूर तक कोई नहीं ठहरता। बिरादरी में उनकी एक आवाज पर लोग खेत-खलिहान छोड़ कहीं भी हुंकार भरने को हर समय तैयार नजर आते हैं। सत्तारूढ़ भाजपा धर्मेन्द्र कश्यप की ताकत एवं जनता पर पकड़ को बखूबी जानती है। यही वजह है कि जरूरत के समय उनको दूसरे चुनाव क्षेत्रों में भेजकर पार्टी चुनावी मोर्चे पर अपनी ताकत बढ़ाती रही है।

सूत्रों का कहना है कि ओबीसी पॉलटिकस से जुड़ी भविष्य की योजनाओं के साथ सत्तारूढ़ भाजपा पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप का पार्टी में कद और बढ़ा सकती है ! बिहार चुनाव में शानदार जीत के बाद ऐसी चर्चाएं और जोर पकड़ रही हैं। दूसरी ओर, मिसाल-बेमिसाल पिता धर्मेन्द्र कश्यप की कहानी को अब एडवोकेट कीर्ति कश्यप भी आगे बढ़ाने में जुटी हैं। पूर्व सांसद कश्यप की दो बेटियां हैं। एक बेटी एमबीबीएस, एमडी कर चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में उतरने जा रही हैं, जबकि दूसरी बेटी कीर्ति कश्यप एलएलएम की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजनीति के मैदान में कदम रख चुकी हैं।

पॉलटिक्स के माहिर खिलाड़ी धर्मेन्द्र कश्यप की लंबी क्लास में लंबी शिक्षा लेकर सियासी पिच पर आईं बेटी कीर्ति कश्यप भी अपने खास अंदाज से जनता की पसंद बन रही हैं। कीर्ति कश्यप की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके आने की खबर पाकर महिलाएं-बेटियां दौड़ती दिखाई देती हैं। कीर्ति कश्यप क्षेत्र में लगातार चौपालें लगा रही हैं। छोटे-बड़े हर एक कार्यक्रम और अनुष्ठान में उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। खुशी हो या कम, अपने समर्थक और कार्यकर्ताओं के बीच हर वक्त दिखाई दे रही हैं। इससे भी बड़ी बात ये है कि घरों के अंदर चौका-चूल्हे तक पहुंचकर सबसे अलग महिलाओं और युवा वर्ग के बीच सबके दिलों में अपनी अलग जगह बना रही हैं।

पिता की तरह लोगों की थाने-तहसील जैसी समस्याएं निपटाने में भी लोगों की जमकर मदद कर रही हैं। परिवार व पिता के संस्कारों की झलक के साथ वह जनता के बीच वह जितनी सहज-सरल दिखाई देती हैं, राजनैतिक बहसों में वह उतना ही मुखर भी नजर आ रही हैं। उम्र और दौर की कसौटी पर रखकर लोग यह कहने में बिल्कुल भी गुरेज नहीं कर रहे हैं कि राजनैतिक विरासत संभालने की दौड़ में एडवोकेट कीर्ति कश्यप अभी से बढ़त बनाती दिख रही हैं। पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप के तेवर व तैयारियों के चर्चे इस समय पूरे रुहेलखंड में सबकी जुबान पर देखे जा रहे हैं। यही चर्चाएं धर्मेन्द्र कश्यप एवं कीर्ति कश्यप के राजनैतिक विरोधियों की रातों की नींद उड़ा रही हैं।













